2024 के आम चुनाव को लेकर पूरे देश में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गयी है। अपने सूबे झारखण्ड मे सत्ता पर काबिज हेमंत सरकार के सहयोगियों ने अपने-अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए है। पार्टी के विधायकों ने अपनी औकात बढ़ाने का अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी के बोरियो विधायक लोबिन हेम्ब्रम पहले से ही पार्टी के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। इधर बिशुनपुर के विधायक चमरा लिंडा ने भी आका हेमंत सोरेन को ताकत का एहसास कराने की तैयारी कर ली है। सूबे मे झामुमो की सरकार बनने के बाद लिंडा मंत्री पद के लिए लालायित थे लेकिन आका ने उन्हें किनारे का रास्ता दिखा दिया। पार्टी फोरम पर भी वे अपनी चाहत का इजहार करते रहे लेकिन संगठन और उसके आका के कानों पर जूं तक नही रेंगी। इतना ही नहीं लोहरदगा संसदीय सीट पर भी लिंडा की नजर है परन्तु उनकी दाल ना तो संगठन मे गल रही है और ना ही सीएम के समक्ष इसलिए लिंडा ने सरकार को उसकी औकात बताने की ठान ली है और बहाना है आदिवासियों के अधिकार। आगामी 16 फरवरी को लिंडा ने आदिवासियो के अधिकारो की रक्षा के लिए एक विशाल रैली का आयोजन किया है। यह रैली एच ई सी के प्रभात तारा मैदान में कोल्हान और दक्षिणी छोटानागपुर के आदिवासियों के लिए बुलाई गयी है। दरअसल लिंडा इस रैली रूपी तीर से दो निशाना साधने की फिराक में है। उनकी योजना है कि रैली के शक्ति प्रदर्शन को देखकर या तो झामुमो उन्हे भाव देना शुरू करे या फिर भाजपा उन्हे कैच कर ले। लिंडा ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद इस मैदान में यह दूसरी महारैली होगी जिसमे आदिवासियों का महाजुटान होगा।
इस महारैली के माध्यम से भी लिंडा भाजपा को अपनी ताकत दिखाकर लोहरदगा सीट पर अपना दावा पेश करना तो चाहते ही है साथ ही उनका सीधा निशाना हेमंत सोरेन भी है। इस रैली रूपी हनुमान-कूद से चमरा लिंडा क्या हासिल कर पाएंगे यह तो समय के गर्भ में है लेकिन इतना जरूर है लिंडा के ऐलान ने झारखंड की सियासत को गर्म कर दिया है

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