धनबाद, फिर वहीं अग्निकांड, भीषण हादसा, हृदय विदारक चीख पुकार मौत के दहलीज पर खड़े सैकड़ो लोग जिसमें से चैदह लोगों की अग्निसमाधि और दर्जनों लोग अस्पताल में ईलाजरत। भवन निर्माण संबंधी विभागों की एक बार फिर से पोल खुली और सत्ताशीर्ष के लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की मुआवजे की रकम का एलान किया और वही जांच टीम का गठन किया जिसका नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ वाली साबित होगी। सवाल यह है कि आखिर कब तक मानवीय जिन्दगी से खिलवाड़ होता रहेगा, कब तक पैसे के लालची अफसरान सुरक्षा नियमों की धज्जी उड़ाते रहेंगे और कब तक सत्ताशीर्ष पर बैठे लोग मुआवजा और शोक संवेदनाओं का ढोल पीटकर अपना पल्ला झाड़ते रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही हमने हाजरा अस्पताल अग्निकांड को आधार बनाते हुए शहर के इन गगनचुंबी इमारतों की हकीकत को उजागर किया था जहां सुरक्षा संबंधी तमाम उपायों को नजरअंदाज करते हुए अनेक निर्माण किये गये थे और तुरंत की इसकी सच्चाई सामने आ गयी। शहर के व्यस्तम इलाके जोड़ाफाटक रोड पर अवस्थित 10 मंजिला इमारत आशीर्वाद टाॅवर में भीषण अग्निकांड हुआ। बचाव के सारे प्रयास धरे के धरे रह गये और दस महिलाओं समेत कुल 14 लोगों ने अग्निसमाधी ले ली। साथ ही दर्जनों लोग पास के पाटलीपुत्र नर्सिंग होम में मौत से जूझ रहे है। इस हृदय विदारक अग्निकांड पर राज्यपाल, सूबे के मुख्यमंत्री यहां तक की प्रधानमंत्री तक ने शोक संवेदना व्यक्त की और प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख और घायलों को पचास-पचास हजार देने की घोषणा भी की गई। लेकिन क्या इस अग्निकांड में अनाथ और बेसहारा हो चुके जिन्दगी को दो लाख रूपया देकर पल्ला झाड़ लेना उचित है ? कदापि नहीं मानवीय जिन्दगी के साथ मौत का खेल, खेल रहे इन सौदागरों और भवन निर्माण की सुरक्षा संबंधी नियमों की देखरेख से जुड़े अफसरानों के खिलाफ कड़े कदम उठाने होंगे तभी जाकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। फिर कोई अग्निकांड हो इससे पहले अभियान चलाकर ऐसी तमाम इमारतों में सुरक्षा नियमों की जांच होनी चाहिए जहां सैकड़ों जिन्दगियां सांस ले रही है और खामियां पाये जाने पर उचित कार्रवाई भी होनी चाहिए न की चोर-चोर मौसेरे भाई की तर्ज पर पूरा मामला दाखिल दफ्तर हो जाना चाहिए।

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