धनबाद स्थित हाजरा मेमोरियल क्लिनिक में हुए अग्निकांड का मामला सघन जांच का विषय बन गया है। इस भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर में मानो खतरे की घंटी बजा दी है। इतना बड़ा और प्रतिष्ठित अस्पताल जहाँ सिर्फ धनबाद ही नहीं अपितु दूसरे जिलों से भी लोग इलाज हेतु आते थे मगर किसी को इस बात का एहसास तक नहीं था कि इस प्रतिष्ठित अस्पताल में ऐसा भी कुछ हो सकता है। आग कैसे लगी इस बात को फिलहाल दरकिनार भी कर दे तो भी यह बात समझ से परे है यहाँ आग बुझाने संबंधी अग्निशमन उपकरण क्यों नहीं था या फिर था तो उसका प्रयोग समय रहते क्यों नहीं किया गया। दूसरी बात यह कि किसी भी बहुमंजिली इमारत को बनाने से पहले उसका जो नक्शा पास कराना होता है उसमें इमारत की तमाम सुरक्षा संबंधी पहलुओं को पुख्ता करने के बाद ही नक्शा पास किया जाता है मसलन अग्निकांड जैसे खतरों से निपटने के लिए इमारत के चारों ओर दमकल के आने-जाने के लिए जगह रखना अनिवार्य होता है यह भीषण अग्निकांड भी सुरक्षा नियमों की अनदेखी का ही परिणाम है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
इन सारी बातों के दायरे में इस अग्निकांड की जाँच होनी चाहिए यह तो मुख्य मुद्दा है ही लेकिन यह भी सच है कि इस अग्निकांड ने शहर के दर्जनो अपार्टमेंटो और माॅल आदि को भी निशाने पर ला खड़ा किया है। उल्लेखनीय है कि शहर में दो चार वर्षों के अंदर धड़ल्ले से अपार्टमेंटो और मार्केट, काॅम्पलेक्स तथा माॅल का निर्माण हुआ है कई अपार्टमेंट तो इतनी संकरी गलियों और घनी आबादी के बीच अवस्थित है कि आग लगने पर दमकल तक के वहां पहुंचने की संभावना नहीं है। ऐसे में अगर दुर्भाग्यवश वहां इस तरह का अग्निकांड हो जाय तो सैकड़ो लोग मारे जाएंगे और जिला प्रशासन जांच का ढ़ोल पीटता रह जाएगा।
इस अग्निकांड को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को एक अभियान चलाकर ऐसी इमारतों अपार्टमेंटों और माॅल आदि जगहों पर हर तरह के सुरक्षा संसाधनों की जाँच करनी चाहिए, भवन निर्माण के मापदंडो को पूरा किया गया है या नहीं इसकी भी आमूल चूल परीक्षण होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी किसी भीषण और लोमहर्षक घटना का सामना धनबाद की आम जनता को नहीं करना पडे़।






