
सूर्या हांसदा का पुलिस एनकाउंटर – सच्चाई या साजिश?
सूर्या हांसदा, पुलिस एनकाउंटर में मारा गया एक व्यक्तित्व। पुलिस रिकॉर्ड में इसे अपराधी बताते हुए एक मुठभेड़ दिखाया गया और फिर सूर्या की एनकाउंटर की खबर चारों ओर फैल गई। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इस कथित अपराधी ने राजनीतिक गलियारों में अपनी अच्छी खासी पहचान बना रखी थी। तभी तो झारखंड की राजनीति में इस एनकाउंटर के बाद आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है।
संदर्भ स्रोत
- संदर्भ स्रोत (References)
- सूर्या हांसदा एनकाउंटर: अर्जुन मुंडा का सरकार पर आरोप – Navbharat Times
- BJP team visits Hasda’s village, seeks probe – Times of India
- बाबूलाल मरांडी का बयान: यह हत्या है, जांच हो – Navbharat Times
- Lawyer moves NHRC over Godda encounter – Times of India

अर्जुन मुंडा से लेकर बाबूलाल मरांडी जैसे पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके नेताओं ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सूर्या हांसदा को गरीबों, शोषितों का मसीहा और माफिया विरोधी व्यक्तित्व बताया है। यहां तक कि अर्जुन मुंडा ने 17 अगस्त को सूर्या के घर जाने तक की घोषणा कर डाली है।
- बाबूलाल मरांडी ने सूर्या की मौत को हत्या बताते हुए कहा कि यह माफिया और पुलिस के गठजोड़ का परिणाम है।
- अर्जुन मुंडा ने भी एनकाउंटर को फर्जी करार दिया और कहा कि सूर्या को माफिया के खिलाफ लड़ाई का खामियाजा भुगतना पड़ा।
- 17 अगस्त को अर्जुन मुंडा ने सूर्या के घर जाने की घोषणा भी की।
कौन थे सूर्या हांसदा?

सूर्या पर अपराध से संबंधित 32 मामले दर्ज हैं। बोआरीजोर इलाके का डॉन कहा जाने वाला सूर्या ने अपराध की दुनिया छोड़कर वर्ष 2009 में राजनीति का दामन थाम लिया तब इसने झारखंड विकास मोर्चा के टिकट से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था लेकिन महज 30 हजार वोट प्राप्त करके चुनाव हार गया। फिर 2019 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट से इसने चुनाव लड़ा परंतु फिर इसे सफलता नहीं मिली हालांकि 61 हजार वोट इसने प्राप्त कर लिया था।
तीसरी बार इसने टाइगर जयराम महतो की पार्टी JKLM से चुनाव लड़ा लेकिन फिर हार गया। सूर्या की मां नीलमणि मुर्मू भी राजनीति से ताल्लुक रखती है और जिप सदस्य के पद पर हैं। सूर्या अपने राजनीतिक कार्यकाल में झारखंड के खनन माफिया, बालू माफिया सहित अन्य माफियाई गतिविधियों के खिलाफ हमेशा संघर्षरत रहा है।
बाबूलाल मरांडी ने खुला आरोप लगाते हुए सूर्या की मौत को हत्या बताया है और कहा है कि यह फर्जी एनकाउंटर है जिसे पुलिस और माफिया के गठजोड़ ने अंजाम दिया है। अर्जुन मुंडा ने भी इसे माफियाओं के विरुद्ध काम करने का परिणाम बताते हुए सूर्या की मौत को हत्या बताया है।
आखिर क्या है सच्चाई। कौन है वे माफिया तत्व क्या वे झारखंड की राजनीति में दखल रखते हैं यदि नहीं तो फिर जनसंघर्ष से जुड़े सूर्या हांसदा जैसे नेता को 2009 से 2025 तक स्वच्छ और राजनीतिक जीवन गुजारने के बाद अचानक से गिरफ्तार कर लेना और फिर एनकाउंटर दिखाकर मार देना कैसे संभव हुआ।
क्या इस साजिशपूर्ण हत्याकांड का खुलासा कभी हो पाएगा। हालांकि सूर्या के परिजन और विधायक जयराम महतो ने इस कांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है तथा सूर्या की मौत से उपजे सवालों का जवाब सरकार से मांगा है। आदिवासी हितों के लिए लड़ने वाले इस आदिवासी नेता की हत्या के लिए जिम्मेवार रहे लोगों का असली चेहरा जनता के सामने तभी आ पाएगा जब इसकी जांच सीबीआई से निष्पक्ष होकर कराई जाएगी। फिलवक्त तो इस मौत ने झारखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
- सूर्या हांसदा पर 32 आपराधिक मामले दर्ज थे।
- बोआरीजोर इलाके का डॉन कहे जाने वाले सूर्या ने 2009 में राजनीति की राह चुनी।
- उन्होंने तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ा—
- 2009: JVM से चुनाव लड़ा, 30 हजार वोट मिले।
- 2019: भाजपा से लड़े, 61 हजार वोट मिले लेकिन हार गए।
- तीसरी बार JKLM पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन असफल रहे।
- सूर्या की मां नीलमणि मुर्मू भी राजनीति से जुड़ी हैं और जिप सदस्य के पद पर हैं।
माफियाओं के खिलाफ संघर्ष
सूर्या हांसदा ने अपने राजनीतिक करियर में खनन माफिया, बालू माफिया और अन्य आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। इसी वजह से उन्हें गरीबों और शोषितों का मसीहा भी कहा जाता था।
जांच की मांग और राजनीति में भूचाल
सूर्या के परिजनों और विधायक जयराम महतो ने इस पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। आदिवासी हितों के लिए लड़ने वाले सूर्या की मौत ने पूरे राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
बड़ा सवाल – एनकाउंटर या राजनीतिक हत्या?
सवाल अब भी बना हुआ है:
- क्या सूर्या की मौत वाकई एनकाउंटर थी?
- या फिर यह एक साजिशपूर्ण हत्या थी, जिसमें राजनीतिक और माफियाई तत्व शामिल थे?
- क्या कभी इसकी सच्चाई सामने आ पाएगी?
निष्कर्ष
सूर्या हांसदा की मौत ने झारखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है। अगर यह हत्या है तो जिम्मेदार लोगों का असली चेहरा तभी सामने आएगा जब जांच निष्पक्ष होगी।
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