इसी कहावत को चरितार्थ करने में जुटा है धनबाद का नगर निगम। निगम का चुनाव फिलवक्त टल गया है और कुर्सी के सारे दावेदार कान में तेल डालकर सो गये है। चुनाव के बाद कौन टिकेगा और कौन जाएगा यह भविष्य के गर्भ में है। इसलिए निगम के वर्तमान आकाओं ने पावर गेम की शुरूआत कर दी है लेकिन पावर दिखाएं किस पर ? बेचारे गरीब गुरबे दुकानदारों की शामत आ गयी और फिर चला अतिक्रमण का डंडा और उजाड़ डाले सैकड़ों आशियाने, रोजी-रोटी का ठिकाना। यहाॅ यह बताते चले कि पूरे शहर मे निगम की लापरवाही के कारण सड़क, नाले, गड्ढे सभी मिलकर एक हो गये है आम नागरिक प्रतिदिन इन परेशानियों से जुझ रहा है, दुर्घटनाए हो रही है पर निगम के आकाओ के कान में जूं तक नहीं रेंग रही इसके विरोध में प्रदर्शन भी हो रहे है प्रदर्शनकारियो ने बताया कि सड़क की इस हालत के लिए भी निगम ही जिम्मेवार ह। निगम के पाईप लाईन का काम होने के कारण जगह-जगह गड्ढे बना दिए गये। पाइप लाइन का लाभ तो अब तक नही मिला लेकिन समस्याओं ने मुॅह खोल दिया फिलवक्त शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत उजाड़े गये दुकानदार और सड़क नाली, बिजली, पानी की समस्याओं से त्रस्त लोगो का धरना प्रदर्शन जारी है परन्तु समाधान शुन्य है।

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