अमिताभ बच्चन

मुंबई में अमिताभ बच्चन के घर ‘जलसा’ के बाहर हर रविवार एक जाना-पहचाना नजारा देखने को मिलता है। सैकड़ों लोग अपने पसंदीदा अभिनेता की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। अमिताभ भी घर से बाहर आकर हाथ जोड़ते हैं, हाथ हिलाते हैं और अपने प्रशंसकों का अभिवादन करते हैं। पिछले कई दशकों से यह सिलसिला चला आ रहा है। लेकिन 1 नवंबर को जब वह घर से बाहर आए, तो इस बार नजारा कुछ बदला हुआ था।

अमिताभ बच्चन प्रशंसकों के सामने आए जरूर, लेकिन उनके और लोगों के बीच एक पारदर्शी सुरक्षा घेरा लगा हुआ था। वह इसी घेरे के भीतर खड़े होकर लोगों का अभिवादन कर रहे थे। इस घेरे को बुलेटप्रूफ बताया जा रहा है। उनके बेटे अभिषेक बच्चन भी वहां मौजूद थे। आसपास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती थी और प्रशंसक बैरिकेड के पीछे खड़े थे।

अमिताभ के लिए रविवार को प्रशंसकों से मिलना कोई नई बात नहीं है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने यह परंपरा जारी रखी है। मगर जिस अभिनेता ने करीब पांच दशक तक खुलेआम अपने चाहने वालों का अभिवादन किया, उसे अब अपने ही घर के बाहर सुरक्षा घेरे के भीतर खड़ा होना पड़ रहा है। इसकी वजह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं, बल्कि मुंबई में फिल्मी सितारों को मिल रही धमकियों का बढ़ता सिलसिला भी है।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि जलसा के बाहर इस तरह का इंतजाम करना पड़ा? इसका जवाब पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं में मिलता है।

टाइगर श्रॉफ की कार पर चली गोलियां, सितारों के घरों की रेकी की खबर

18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी हुई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, दो हमलावरों ने उनकी कार को निशाना बनाया। टाइगर उस समय फुटबॉल खेलने के बाद लौट रहे थे। वह इस हमले में सुरक्षित रहे, लेकिन घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी।

इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों का नाम सामने आया। हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा भी किया गया। पुलिस ने आरोपियों की तलाश की और इस सिलसिले में कई गिरफ्तारियां हुईं।

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हमले में शामिल लोगों ने टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने से पहले बॉलीवुड के कुछ दूसरे बड़े सितारों के घरों की भी रेकी की थी। अमिताभ बच्चन के अलावा सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान और अक्षय कुमार के नाम भी इस सूची में बताए गए।

यानी जिस गिरोह का नाम टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी में सामने आया, उसकी नजर कथित तौर पर दूसरे बड़े फिल्मी सितारों पर भी थी। पुलिस इस मामले में आरोपियों की भूमिका और उनके संपर्कों की जांच कर रही है।

जलसा को भी मिली धमकी

टाइगर श्रॉफ पर हमले के कुछ ही दिन बाद अमिताभ बच्चन के घर को लेकर धमकी की खबर सामने आई।

23 अक्टूबर को मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े और कुछ दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को एक धमकी भरा ईमेल भेजे जाने की जानकारी मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, इस ईमेल में अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित घर जलसा का भी जिक्र था। इसमें 31 अक्टूबर से 27 नवंबर के बीच जलसा को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। गायक दिलजीत दोसांझ के मुंबई में होने वाले कार्यक्रम का भी ईमेल में उल्लेख था।

ईमेल मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। जिन जगहों का नाम उसमें लिखा था, वहां सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस ने ईमेल भेजने वाले की पहचान करने और यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि धमकी के पीछे कौन है।

यहां एक बात साफ रहनी चाहिए। किसी ईमेल में धमकी लिख देने का मतलब यह नहीं कि हमले की योजना सचमुच तैयार हो चुकी है। पुलिस को उसकी गंभीरता और विश्वसनीयता की जांच करनी होती है। लेकिन जब किसी अभिनेता के घर का नाम इस तरह सामने आए, तो सुरक्षा बढ़ाना स्वाभाविक है।

टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी, सितारों के घरों की कथित रेकी और फिर जलसा को मिली धमकी को एक साथ देखें, तो अमिताभ बच्चन के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ाए जाने की वजह समझ में आती है।

सलमान खान से लेकर रोहित शेट्टी तक, सितारे निशाने पर

मुंबई में फिल्मी सितारों को धमकियां मिलने का सिलसिला अब किसी एक नाम तक सीमित नहीं रहा। अप्रैल 2024 में सलमान खान के बांद्रा स्थित घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर गोलीबारी हुई थी। इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों के नाम सामने आए। इसके बाद सलमान की सुरक्षा बढ़ा दी गई और उन्हें लगातार कड़ी सुरक्षा में रहना पड़ रहा है।

फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर भी गोलीबारी की घटना हुई। रणवीर सिंह को धमकी मिलने की खबर सामने आई। वहीं, पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में भी बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों के नाम सामने आए। इन घटनाओं के बाद मुंबई में सक्रिय इस गिरोह की गतिविधियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल जेल में है, लेकिन पुलिस का आरोप है कि उसका गिरोह बाहर अपना नेटवर्क चलाता रहा है। विदेश में बैठे उसके कथित सहयोगियों और स्थानीय युवकों के जरिए धमकियां देने और हमलों को अंजाम देने की बात जांच में सामने आती रही है।

यही वजह है कि केवल लॉरेंस बिश्नोई के जेल में होने से इन वारदातों पर रोक नहीं लग पा रही। पुलिस को उन लोगों तक पहुंचना है जो बाहर रहकर गिरोह का काम संभाल रहे हैं और स्थानीय स्तर पर हमलों के लिए लोगों को तैयार करते हैं।

पुलिस के हाथ क्यों बंधे हुए हैं?

हिंदुस्तान टाइम्स की 20 अक्टूबर की रिपोर्ट में मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई से पूछताछ में आ रही दिक्कतों का जिक्र किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अलग-अलग जेलों में बंद हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश के कारण उन्हें संबंधित मामलों में पूछताछ के लिए मुंबई लाना मुश्किल हो रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना था कि जेल में जाकर पूछताछ करना और आरोपी को पुलिस हिरासत में लेकर सवाल करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। पुलिस हिरासत में जांच अधिकारी आरोपी से लगातार पूछताछ कर सकते हैं, उसके जवाबों के आधार पर दूसरे लोगों से सामना करा सकते हैं और जांच को आगे बढ़ा सकते हैं।

यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि पुलिस को सिर्फ उन लोगों की पहचान नहीं करनी है जिन्होंने गोली चलाई या धमकी दी। उसे यह भी पता लगाना है कि हमले का आदेश किसने दिया, निशाना चुनने के पीछे क्या वजह थी और पूरी साजिश कहां से संचालित हो रही थी।

अगर गिरोह के बड़े लोगों तक जांच एजेंसियों की पहुंच ही मुश्किल बनी रहेगी, तो उसके नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाना भी आसान नहीं होगा। हालांकि, यह भी देखना होगा कि पुलिस दूसरे गिरफ्तार आरोपियों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को कहां तक ले जाती है।

मोदी-शाह की सरकार से भी पूछे जा रहे सवाल

अमिताभ बच्चन को बुलेटप्रूफ घेरे के भीतर देखकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को घेरा। सवाल उठाया गया कि अगर देश के सबसे बड़े फिल्मी सितारों को भी अपनी सुरक्षा के लिए इस तरह के इंतजाम करने पड़ रहे हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या हाल होगा?

कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली सरकार से पूछा कि लॉरेंस बिश्नोई जैसे गैंगस्टरों पर आखिर लगाम क्यों नहीं लग पा रही। उनका कहना है कि गैंग के नाम पर लगातार धमकियां दी जा रही हैं, गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं और बड़े लोगों को निशाना बनाने की बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में सरकार की कार्रवाई का असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?

मुंबई में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार और राज्य पुलिस की है। वहीं, जेल में बंद आरोपियों, दूसरे राज्यों में फैले नेटवर्क और विदेश से संचालित होने वाले गिरोहों के मामलों में केंद्रीय एजेंसियों और केंद्र सरकार की भूमिका भी सामने आती है। इसलिए इस पूरे मामले में सवाल सिर्फ एक सरकार से नहीं, उन सभी एजेंसियों से है जिनके पास ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है।

आखिर किसी गैंग का नाम बार-बार धमकियों और हमलों में क्यों आ रहा है? उसके लोग स्थानीय स्तर पर कैसे पहुंच बना रहे हैं? जेल में बंद सरगना के नाम पर बाहर से धमकियां कौन दे रहा है? और जिन लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है, क्या उनसे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा रहा है?

इन सवालों के जवाब सिर्फ गिरफ्तारियों की संख्या बताने से नहीं मिलेंगे। जरूरत इस बात की है कि पुलिस उन लोगों तक पहुंचे जो इन वारदातों की योजना बनाते हैं और दूसरों के जरिए उन्हें अंजाम दिलाते हैं।

अमिताभ ने रविवार की परंपरा नहीं छोड़ी, बस सुरक्षा बदल गई

अमिताभ बच्चन के लिए जलसा के बाहर प्रशंसकों से मिलना उनके जीवन का पुराना हिस्सा है। रविवार को लोग दूर-दूर से सिर्फ उन्हें देखने आते हैं। कई प्रशंसक उनके घर के बाहर घंटों खड़े रहते हैं, इस उम्मीद में कि कुछ सेकंड के लिए ही सही, उन्हें अपने पसंदीदा अभिनेता की झलक मिल जाए।

इस बार भी अमिताभ बाहर आए। उन्होंने लोगों का अभिवादन किया, हाथ जोड़े और हाथ हिलाया। फर्क सिर्फ इतना था कि उनके और प्रशंसकों के बीच बुलेटप्रूफ सुरक्षा घेरा मौजूद था। अभिषेक बच्चन भी उनके साथ खड़े दिखाई दिए।

अमिताभ बच्चन ने प्रशंसकों से मिलने की अपनी परंपरा तो नहीं छोड़ी, लेकिन अब उस मुलाकात के लिए भी सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूरी हो गई है।

जलसा के बाहर लगा यह पारदर्शी घेरा सिर्फ एक अभिनेता की सुरक्षा का इंतजाम नहीं है। इसके पीछे टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी, सलमान खान के घर के बाहर हमला, दूसरे सितारों को मिली धमकियां और अब अमिताभ के घर का नाम धमकी भरे ईमेल में आने जैसी घटनाएं हैं।

मुंबई पुलिस इन मामलों की जांच कर रही है। लेकिन जब तक धमकियां देने और हमलों की साजिश रचने वाले पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक सितारों की सुरक्षा को लेकर यह चिंता बनी रहेगी। अमिताभ बच्चन के घर के बाहर रविवार को दिखा बुलेटप्रूफ घेरा इसी चिंता की एक तस्वीर है।

लेखक: वकार अहमद

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