अचानक भू-धसान से बड़ा गोफ बन गया।

‘झगड़ा देखने नहीं जाते तो आज गोफ में समा जाते’—पीड़ित सुमित कुमार की बात ने बयां किया इलाके का डर

झरिया: बीसीसीएल एरिया 10 के लिलोरी पथरा बालूगद्दा में रविवार को अचानक जमीन धंसने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुमित कुमार के घर के दरवाजे के पास तेज आवाज के साथ जमीन धंसी और कुछ ही देर में वहां बड़ा गोफ बन गया। घटना के वक्त आसपास के लोग अपने घरों में थे। अचानक जमीन धंसने की आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, भू-धसान के बाद आसपास के कुछ घरों में दरारें भी दिखाई दी हैं। घटना के बाद इलाके में रहने वाले परिवारों के बीच डर का माहौल है। कई लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित जगह की तलाश करते नजर आए।

‘बगल में झगड़ा हो रहा था, देखने चला गया और जान बच गई’

भू-धसान के बाद सुमित कुमार ने जो बात बताई, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि घटना कितनी अचानक हुई।

सुमित के मुताबिक, उनके घर के पास कुछ लोगों के बीच झगड़ा हो रहा था। हल्ला सुनकर वह भी झगड़ा देखने के लिए घर से बाहर चले गए। इसी दौरान अचानक तेज आवाज हुई और उनके घर के दरवाजे के पास जमीन धंस गई।

जब वह वापस लौटे तो घर के पास बड़ा गोफ बन चुका था।

सुमित ने कहा, “गनीमत रही कि झगड़ा देखने चले गए थे। अगर वहीं रहते तो आज हम भी इस गोफ में समा जाते।”

उनकी यह बात सुनकर आसपास खड़े लोगों में भी डर साफ नजर आया। लोगों का कहना है कि जमीन कब धंस जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है।

जमीन के नीचे आग और गैस रिसाव का भी दावा

स्थानीय लोगों का दावा है कि भू-धसान वाले इलाके में जहरीली गैस का रिसाव भी हो रहा है। लोगों का कहना है कि जमीन के नीचे आग धधक रही है और ऊपर उनके घर हैं। ऐसे में उन्हें हर समय किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है।

हालांकि गैस रिसाव और भूमिगत आग की स्थिति की तकनीकी पुष्टि संबंधित विशेषज्ञों या प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

भू-धसान की घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भी सामने आया। लोगों ने बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि खतरे की जानकारी होने के बावजूद प्रभावित परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया।

सोनारडीह और छाताबाद का हवाला देकर उठाए सवाल

स्थानीय लोगों ने कतरास के सोनारडीह और छाताबाद में हुई भू-धसान की घटनाओं का हवाला देते हुए बीसीसीएल प्रबंधन पर सवाल उठाए।

लोगों का कहना है कि जब इलाके में जमीन धंसने का खतरा पहले से मौजूद है और प्रभावित परिवारों की पहचान भी की जा चुकी है, तो फिर पुनर्वास में देरी क्यों हो रही है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रबंधन कार्रवाई करेगा।

उनका कहना है कि खतरा अब घरों की चौखट तक पहुंच चुका है। ऐसे में केवल सर्वे या सूची तैयार करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना जरूरी है।

‘घर बचा भी तो रहें कहां?’

भू-धसान की घटना ने प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या भी खड़ी कर दी है। लोगों का कहना है कि अगर घर में रहना सुरक्षित नहीं है तो वे परिवार और सामान लेकर जाएं तो जाएं कहां।

बारिश का मौसम है। एक तरफ बारिश और दूसरी तरफ जमीन के नीचे आग और गैस का डर लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।

स्थानीय लोगों ने बीसीसीएल से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। लोगों का कहना है कि जब खतरा सामने दिखाई दे रहा है तो कागजी प्रक्रिया के नाम पर उन्हें और इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।

182 प्रभावित लोगों की सूची, फिर भी इंतजार

स्थानीय लोगों के अनुसार, लिलोरी पथरा बालूगद्दा इलाके में 182 प्रभावित लोगों की सूची तैयार की गई है। इसके बावजूद अब तक सभी परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

लोगों का कहना है कि जब प्रभावित परिवारों की सूची तैयार है तो फिर पुनर्वास में देरी का कारण क्या है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि सर्वे में अगर किसी प्रभावित परिवार का नाम छूट गया है तो उसकी भी दोबारा जांच कर उसे सूची में शामिल किया जाए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनका मकसद सिर्फ मुआवजा या पुनर्वास की मांग करना नहीं है। सबसे पहले वे अपने परिवार की सुरक्षा चाहते हैं।

अब लोगों को कार्रवाई का इंतजार

लिलोरी पथरा बालूगद्दा में जमीन धंसने की घटना ने एक बार फिर कोयला क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घर के ठीक सामने जमीन का इस तरह धंस जाना लोगों के लिए सिर्फ एक घटना नहीं है। जिन परिवारों के घर इस इलाके में हैं, उनके लिए यह रोज का डर है कि अगली बार जमीन कहां धंसेगी।

स्थानीय लोग अब बीसीसीएल प्रबंधन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि खतरे वाले इलाकों की दोबारा जांच कराई जाए, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए और पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

फिलहाल लिलोरी पथरा बालूगद्दा में बने इस नए गोफ के बाद लोगों की नजर बीसीसीएल और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि जमीन क्यों धंसी, बल्कि यह भी है कि जिन परिवारों की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं, उन्हें सुरक्षित करने के लिए कार्रवाई कब होगी।

लेखक: वकार अहमद

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