धनबाद: मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में धनबाद पुलिस ने लोगों को ठगी के नए-नए तरीकों से सावधान करने के लिए अपना साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान और तेज कर दिया है। गुरुवार को जिले के स्कूल-कॉलेजों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पुलिस की टीमें पहुंचीं और विद्यार्थियों व आम लोगों को साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए।

साइबर ठगी से बचाने की मुहिम तेज

वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत जिले के 235 स्कूलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 78 विद्यालयों में पुलिस टीमों ने सीधे पहुंचकर विद्यार्थियों से बातचीत की, जबकि 157 सरकारी स्कूलों में एक-एक घंटे के विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए।

अभियान का फोकस सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहा। पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में प्रचार वाहनों के जरिए वीडियो संदेश भी प्रसारित किए, ताकि उन लोगों तक भी साइबर सुरक्षा की जानकारी पहुंच सके, जो नियमित रूप से सोशल मीडिया या ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं।

स्कूल-कॉलेजों में पुलिस ने समझाए ठगी के तरीके

साइबर अपराध को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों की शुरुआत शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों के शिक्षण संस्थानों से भी हुई। सिटी एसपी रित्विक श्रीवास्तव के नेतृत्व में लॉ कॉलेज में कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों और उनसे बचने की सावधानियों के बारे में बताया गया।

राजगंज स्थित बड्स गार्डन स्कूल में ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों को समझाते हुए विद्यार्थियों से किसी भी अनजान व्यक्ति या ऑनलाइन संदेश पर जल्दबाजी में भरोसा नहीं करने की अपील की।

पुलिस उपाधीक्षक साइबर प्रदीप कुमार साव के नेतृत्व में गुरुनानक कॉलेज में भी जागरूकता कार्यक्रम हुआ। वहीं निरसा एसडीपीओ लिलेश्वर महतो के नेतृत्व में जवाहर नवोदय विद्यालय में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई।

78 स्कूलों तक पहुंची पुलिस की टीम

अभियान के दौरान जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों ने स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को साइबर ठगी से जुड़े मामलों की जानकारी दी।

गोविंदपुर के महेंद्र उच्च विद्यालय और कालाडाबर पंचायत भवन, लोयाबाद के बीबीएस हाईस्कूल, तोपचांची के मैनफोर्ट स्कूल और डीएवी उच्च विद्यालय, महुदा के मिडिल स्कूल, कतरास के जीएनएम उच्च विद्यालय और बरवाअड्डा के यादवपुर स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इसी तरह कियारी उच्च विद्यालय, पंडुकी मध्य विद्यालय, टुंडी के उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पंचेत के वैली पब्लिक स्कूल, गौशाला के एसपीएम इंटर कॉलेज, भाटडीह ओपी क्षेत्र के उत्क्रमित उच्च विद्यालय, तेतुलमारी के संत जेवियर स्कूल, मधुवन थाना क्षेत्र के उच्च विद्यालय और डीपीएल स्कूल में भी पुलिस टीम पहुंची।

केंदुआडीह-कुस्तौर आदर्श विद्यालय और भूली स्थित सरस्वती विद्या मंदिर समेत कई अन्य स्कूल भी अभियान का हिस्सा रहे।

157 सरकारी स्कूलों में हुए एक घंटे के सत्र

अभियान के तहत जिले के 157 सरकारी विद्यालयों में भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर ठगी से बचने के लिए छोटी-छोटी सावधानियां कितनी महत्वपूर्ण हैं।

पुलिस ने खास तौर पर अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, किसी के साथ ओटीपी साझा नहीं करने और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देने की सलाह दी। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय भी निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतने को कहा गया।

पुलिस ने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों को डराकर, लालच देकर या जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए मजबूर करके ठगी करते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय पहले पूरी जानकारी की जांच करना जरूरी है।

गांवों में प्रचार वाहनों से पहुंचा संदेश

शहर और स्कूलों के अलावा पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में भी अभियान चलाया। राजगंज, तोपचांची, टुंडी, मनियाडीह और पूर्वी टुंडी के विभिन्न इलाकों में प्रचार वाहनों के जरिए वीडियो संदेश दिखाकर लोगों को साइबर अपराध के प्रति सतर्क किया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल फोन और डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए पुलिस की कोशिश है कि साइबर सुरक्षा से जुड़ी जरूरी बातें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचें।

पुलिस ने लोगों से अपील की कि यदि उनके साथ किसी तरह की साइबर ठगी होती है या कोई संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि सामने आती है, तो उसे नजरअंदाज न करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी जरूरी कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी।

शहर से गांव तक लगातार चलेगा अभियान

धनबाद पुलिस का यह अभियान फिलहाल स्कूलों और कॉलेजों तक सीमित नहीं है। पुलिस की ओर से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध से निपटने में पुलिस की कार्रवाई के साथ आम लोगों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है।

एक अनजान लिंक, फर्जी कॉल या जल्दबाजी में साझा किया गया ओटीपी किसी के बैंक खाते को खाली कर सकता है। इसी खतरे को देखते हुए पुलिस अब लोगों तक पहुंचकर उन्हें पहले से सावधान करने पर जोर दे रही है।

235 स्कूलों तक पहुंचा यह अभियान इसी कोशिश का हिस्सा है। धनबाद पुलिस की योजना ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों को साइबर ठगी के तरीकों की जानकारी देने की है, ताकि ठगी होने के बाद कार्रवाई करने से पहले ही लोग उसके जाल में फंसने से बच सकें।

लेखक: वकार अहमद

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