
नई दिल्ली: करीब 13 साल पुराने रेप मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने जूनियर महिला सहकर्मी से रेप के मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसी मामले में वर्ष 2021 में गोवा की एक ट्रायल कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया था, लेकिन गोवा सरकार ने उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है।
मामला नवंबर 2013 का है। उस समय तरुण तेजपाल तहलका के संपादक थे। आरोप था कि गोवा में पत्रिका की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने होटल की लिफ्ट में अपनी जूनियर महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया और उसके साथ रेप किया। मामला सामने आने के बाद इसकी काफी चर्चा हुई थी और पुलिस ने जांच शुरू की थी।
2013 में सामने आया था मामला
यह मामला 7 और 8 नवंबर 2013 को हुई घटनाओं से जुड़ा है। महिला सहकर्मी की शिकायत के बाद मामला संस्थान के भीतर पहुंचा और इसके बाद पुलिस तक गया। उस समय यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि तेजपाल देश के जाने-माने पत्रकारों में गिने जाते थे और तहलका अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए जाना जाता था।
मामले में तेजपाल की ओर से भेजे गए एक ईमेल को भी अभियोजन पक्ष ने अहम सबूत के तौर पर अदालत के सामने रखा था। अभियोजन का तर्क था कि ईमेल की सामग्री घटनाओं और दोनों के बीच पद की असमानता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। बचाव पक्ष ने हालांकि इसकी अलग व्याख्या करते हुए घटनाओं को गैर-आपराधिक और सहमति से हुई बातचीत के संदर्भ में देखने की दलील दी थी।
2017 में शुरू हुआ ट्रायल, 2021 में हुए थे बरी
मामले की सुनवाई गोवा के मापुसा स्थित ट्रायल कोर्ट में वर्ष 2017 में शुरू हुई थी। करीब चार साल की सुनवाई के बाद मई 2021 में अदालत ने तरुण तेजपाल को आरोपों से बरी कर दिया।
इस फैसले के तुरंत बाद गोवा सरकार ने साफ कर दिया था कि वह इससे सहमत नहीं है और इसे हाई कोर्ट में चुनौती देगी। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ के पास पहुंचा।
गोवा सरकार की अपील पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अगस्त 2026 में अपना फैसला सुनाया। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को रद्द करते हुए तेजपाल को दोषी माना।
हाई कोर्ट ने ट्रायल के तरीके पर भी उठाए सवाल
हाई कोर्ट का फैसला केवल तेजपाल को दोषी ठहराने तक सीमित नहीं रहा। अदालत ने निचली अदालत में मामले को देखने के तरीके पर भी गंभीर टिप्पणी की।
हाई कोर्ट ने माना कि पीड़िता के व्यवहार को लेकर ऐसी अपेक्षाएं नहीं बनाई जा सकतीं कि यौन हिंसा का सामना करने वाला हर व्यक्ति घटना के बाद एक तय तरीके से ही व्यवहार करेगा। अदालत ने ट्रायल के दौरान पीड़िता के निजी जीवन और उसके व्यवहार पर जरूरत से ज्यादा जोर दिए जाने पर भी सवाल उठाए।
अदालत की इन टिप्पणियों ने इस मामले को एक बार फिर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और यौन अपराधों की सुनवाई के दौरान पीड़ित के साथ होने वाले व्यवहार की बहस के बीच ला खड़ा किया है।
10 साल के कठोर कारावास की सजा
दोषी करार दिए जाने के बाद हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। गोवा सरकार के वरिष्ठ कानून अधिकारी के मुताबिक अदालत ने उन्हें अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले ट्रायल कोर्ट से उन्हें सभी आरोपों में राहत मिल चुकी थी। लगभग पांच साल बाद हाई कोर्ट ने उसी फैसले को पलटते हुए मामले में दोषसिद्धि दर्ज की है।
इस तरह नवंबर 2013 में शुरू हुआ मामला शिकायत, पुलिस जांच, ट्रायल कोर्ट में सुनवाई, बरी किए जाने और फिर राज्य सरकार की अपील से गुजरते हुए अगस्त 2026 में इस मुकाम तक पहुंचा है।
फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे तेजपाल
हालांकि हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद भी कानूनी लड़ाई समाप्त नहीं हुई है। तरुण तेजपाल ने खुद को निर्दोष बताते हुए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं।
ऐसे में इस मामले पर आगे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की संभावना बनी हुई है।
कानूनी तौर पर फिलहाल स्थिति यह है कि 2021 में ट्रायल कोर्ट से मिला बरी होने का फैसला हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है और बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने तेजपाल को मामले में दोषी ठहराकर 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
13 साल बाद फिर चर्चा में आया मामला
तरुण तेजपाल का यह मामला शुरुआत से ही देश के चर्चित मामलों में रहा है। इसकी एक बड़ी वजह उनका पत्रकारिता जगत में जाना-पहचाना नाम होना भी था। तहलका ने अपने शुरुआती वर्षों में कई स्टिंग ऑपरेशन और खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की थीं और भ्रष्टाचार तथा सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े मामलों को लेकर पहचान बनाई थी।
लेकिन 2013 में सामने आए इस मामले ने तेजपाल के करियर को पूरी तरह बदल दिया।
अब करीब 13 साल बाद बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला आने से मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। फर्क इतना है कि जिस मामले में पांच साल पहले ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी किया था, उसी मामले में हाई कोर्ट ने अब उन्हें दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
मामला हालांकि अभी अंतिम कानूनी पड़ाव तक नहीं पहुंचा है। तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। ऐसे में अब निगाह इस पर रहेगी कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी ओर से कब अपील दाखिल की जाती है और सर्वोच्च अदालत इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाती है।
लेखक: वकार अहमद
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