
धनबाद: अगर आने वाले वर्षों में शहरों को पानी के संकट से बचाना है, तो इसकी शुरुआत आज के बच्चों और युवाओं से करनी होगी। इसी सोच के साथ सोमवार को धनबाद के जीवन ज्योति स्कूल में “कैच द रेन – बिल्डिंग ए वाटर-सेक्योर धनबाद, टुगेदर” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को सिर्फ पानी बचाने की सलाह नहीं दी गई, बल्कि उन्हें यह समझाने की कोशिश हुई कि आने वाले समय में शहर के जल संसाधनों की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होगी।
कार्यक्रम में जीवन ज्योति स्कूल के साथ कार्मेल स्कूल और डी नोबिली स्कूल (सीएमआरआई) के छात्र-छात्राएं, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोग शामिल हुए। आयोजन जीवन ज्योति संस्थान, मेघ पाईन अभियान और रोटरी क्लब धनबाद की ओर से किया गया, जबकि धनबाद नगर निगम और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए), नई दिल्ली का सहयोग भी रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत में ही यह बात साफ कर दी गई कि पानी का संकट केवल भविष्य की आशंका नहीं है। यदि अभी से वर्षा जल को सहेजने और भूजल को बचाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में शहरों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

जीवन ज्योति संस्थान के सचिव और वरिष्ठ रोटेरियन राजेश पार्केरिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी शहर को जल-सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकारी विभागों की नहीं हो सकती। समाज, स्कूल, स्थानीय संस्थाएं और आम नागरिक जब तक साथ नहीं आएंगे, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं होगा। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे इस विषय को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि अपने घर और आसपास के लोगों के बीच भी पानी बचाने की आदत विकसित करने की पहल करें।
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र मेघ पाईन अभियान के प्रबंध न्यासी एकलव्य प्रसाद की प्रस्तुति रही। उन्होंने धनबाद में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जल संरक्षण को लेकर हुए प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में कार्मेल स्कूल के विद्यार्थियों के साथ शुरू हुई “गैंग ऑफ 20” पहल ने बाद में कई बड़े अभियानों की नींव रखी। उस समय विद्यार्थियों के साथ मिलकर जो छोटे-छोटे प्रयास शुरू हुए थे, आज वही शहर में भूजल संरक्षण से जुड़ी कई योजनाओं का आधार बन चुके हैं।
उन्होंने धनबाद नगर निगम की ओर से अमृत 2.0 योजना के तहत चल रही शैलो एक्वीफर मैनेजमेंट (SAM) परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। जीवन ज्योति स्कूल, बेरा कॉलोनी, भगतडीह, नीचा मोहल्ला और लक्ष्मी कॉलोनी में चल रहे इन मॉडल प्रोजेक्ट्स के जरिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पारंपरिक जल स्रोतों को फिर से उपयोगी बनाने का काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि स्थानीय स्तर पर ऐसे प्रयास लगातार जारी रहें, तो शहर में भूजल की स्थिति को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है।

रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व निदेशक कमल संघवी ने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि जल संरक्षण किसी एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदत बननी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से पानी का सोच-समझकर उपयोग करने और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। उनके अनुसार, जब बच्चे किसी बदलाव को अपनाते हैं तो उसका असर पूरे परिवार पर दिखाई देता है।
मुख्य अतिथि और धनबाद नगर निगम के नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में भूजल का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्षा जल का सही तरीके से संग्रह और वैज्ञानिक ढंग से भूजल पुनर्भरण भविष्य की जरूरत है। उन्होंने जीवन ज्योति स्कूल में चल रही एसएएम परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इसी मॉडल को दूसरे क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।

पूर्व जिलापाल राजन गांदोत्रा ने अपने संबोधन में शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि जल संरक्षण की स्थानीय प्रयोगशालाओं के रूप में भी विकसित हों। यदि विद्यार्थी अपने क्षेत्र के जल स्रोतों को समझेंगे, वर्षा जल संचयन की व्यवस्था को देखेंगे और भूजल संरक्षण की प्रक्रिया को करीब से जानेंगे, तो वे भविष्य में इस दिशा में बेहतर नेतृत्व कर सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान उन लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिनके क्षेत्रों में एसएएम परियोजनाएं लागू की गई हैं। जीवन ज्योति स्कूल के रंजीत कुमार, झरिया के नीचा मोहल्ला से पूर्णिमा, जबकि सिंदरी की लक्ष्मी कॉलोनी से अशोक शर्मा और परमा देवी ने बताया कि वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के बाद उनके इलाके में पानी की उपलब्धता में सुधार महसूस किया गया है। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय लोग किसी योजना से जुड़ते हैं तो उसका असर लंबे समय तक दिखाई देता है।
चर्चा के दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि विद्यार्थियों को धनबाद नगर निगम क्षेत्र में संचालित सभी पांच शैलो एक्वीफर मैनेजमेंट परियोजनाओं का भ्रमण कराया जाना चाहिए। इससे उन्हें किताबों या प्रस्तुति के बजाय वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना था कि जब छात्र खुद इन परियोजनाओं को देखेंगे और स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे, तब उन्हें जल संरक्षण की आवश्यकता और उसके प्रभाव दोनों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में एक भावुक पल तब आया, जब जीवन ज्योति स्कूल के विशेष बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के साथ राष्ट्रगान गाया। पूरे सभागार ने खड़े होकर उनका उत्साह बढ़ाया और तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही। उपस्थित लोगों ने इसे कार्यक्रम का सबसे प्रेरक क्षण बताया।
करीब दो घंटे तक चले इस आयोजन का संदेश एक ही था—पानी बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। यदि समाज, शैक्षणिक संस्थान और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करें, तो जल संकट जैसी चुनौती का मुकाबला किया जा सकता है। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि यदि आज के विद्यार्थी इस सोच को अपने जीवन का हिस्सा बना लें, तो आने वाले वर्षों में धनबाद जल संरक्षण के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण बन सकता है।

कार्यक्रम का समापन इसी संकल्प के साथ हुआ कि “कैच द रेन” जैसी पहल को केवल एक अभियान बनाकर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि इसे लोगों की रोजमर्रा की आदत और सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाने की दिशा में लगातार प्रयास जारी रहेंगे।

लेखक: वकार अहमद
